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उन्नाव

राज्य उत्तर प्रदेश जिला उन्नाव जिला मुख्यालय उन्नाव जनसंख्या (2011) 3108367 विकास 0.15 लिंग अनुपात 907 साक्षरता 66.37 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4561 घनत्व (/ वर्ग किमी) 682 तहसील बीघापुर, हसनगंज, पूर्वा, उन्नाव, साफीपुर लोकसभा क्षेत्र उन्नाव विधानसभा क्षेत्र बंगरमाउ, भगवंतनगर, मोहन, पूर्वा, उन्नाव, साफीपुर भाषाएं हिंदी सहित अवधी नदियां गंगा नदी अक्षांश-देशांतर 26.539394,80.488536 पर्यटन स्थल नवाबगंज पक्षी अभयारण्य, लिंगेश्वर महादेव मंदिर, मोहब्बतशाह मकबरा, बल्केश्वर नाथ महादेव मंदिर सरकारी कॉलेज/विश्वविद्यालय सेंट जूडस कॉलेज, बेन हुर इंटर कॉलेज सर सैयद इंटर कॉलेज जे एल शाह मेमोरियल कॉलेज गवर्नमेंट इंटर कॉलेज फाॅर बाॅयज, गवर्नमेंट इंटर कॉलेज फाॅर गल्र्स आदि

उन्नाव

उन्नाव     उत्तर प्रदेश   प्रान्त  का एक जिला है। यह लखनउ तथा कानपुर के बीच मे स्थत है, लखनउ लगभग ६० किलोमीटर दूर है कानपुर से १८ किलोमीटर दूर है यह दो शहरों को जोड़ता हुआ एक कस्वा है जो दोनों शहरों के रोडवेज या रेलवे मार्ग को जोड़ता है। नगर को अभी तक अनेक देशभक्त, हिन्दी साहित्य के नाम से जाना जाता है।

चंडिका देवी धाम बक्सर

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चंडिका धाम मे दो विग्रह स्थापित हैं जिन्हे चंडिका व अम्बिका के रूप मे जाना जाता है इनका श्री मुख गंगा की तरफ है। चंडिका धाम की सीढि़यों से सट कर हमेशा गंगा जी का जल प्रवाहित होता है। वैसे तो धाम मे हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है पर यह भीड़ नवरात्र के दिनों में बढ़ जाती है। कानपुर, रायबरेली , फतेहपुर , इलाहाबाद, कौशांबी समेत प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ साथ दूसरे प्रदेशों से भी भक्त मां के दर्शन पूजन के लिए आते हैं। मंदिर मे प्रति दिन तीनों पहर आरती व मां का श्रंगार होता है। चंडिका धाम मे दो विग्रह स्थापित हैं जिन्हे चंडिका व अम्बिका के रूप मे जाना जाता है  चंडिका धाम मे दो विग्रह स्थापित हैं जिन्हे चंडिका व अम्बिका के रूप मे जाना जाता है इनका श्री मुख गंगा की तरफ है। चंडिका धाम की सीढि़यों से सट कर हमेशा गंगा जी का जल प्रवाहित होता है। वैसे तो धाम मे हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है पर यह भीड़ नवरात्र के दिनों में बढ़ जाती है। कानपुर, रायबरेली , फतेहपुर , इलाहाबाद, कौशांबी समेत प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ साथ दूसरे प्रदेशों से भी भक्त मां के दर्शन पूजन के लिए ...

Unnao ki Shaan...!!!

साहित्य और शौर्य की सांस्कृतिक परंपरा वाला बैसवारा क्षेत्र एक राजनैतिक इकाई के रूप में अपनी पुरानी पहचान वापस पाने के लिए प्रयासरत है। बैस राजपूतों के प्रभाव व साढ़े बाइकस परगना का क्षेत्र को होने के कारण इसे बैसवारा कहा गया। इन बाइस परगनों में आज के उन्नाव, रायबरेली व बाराबंकी के थोड़े थोड़े भाग सम्मलित हैं। इन बाइस परगनों में निगोहा, मोहनलालगंज, हसनगंज, हड़हा, सरवन, परसंदन, डौडियाखेड़ा, घाटमपुर, भगवंत नगर, बिहार, पाटन, पनहन, मगरापुर, खीरों, सरेनी, बरेली, डलमऊ, बछरावां, कुम्हरावां, बिजनौर, हैदरगढ़, पुरवा मौरावा शामिल हैं। आई ने अकबर में भी बैसवारा क्षेत्र के उल्लेख हैं। उस समय बैसवारा क्षेत्र में दो हजार दो सौ पांच गांव तथा क्षेत्रफल तेरह लाख चौहत्तर हजार एक सौ चार एकड़ था। कविवर गिरधारी ने भी बैसवारे का वर्णन करते हुए किस क्षेत्र में कौन से राजा का अधिकार था इसका उल्लेख किया है। कहा जाता है कि बैसवारा क्षेत्र की आधार शिला बैस राजपूतों अभयचंद्र व निर्भय चंद्र ने रखी थी। गंगा दशहरा मेले के समय बक्सर आयी अरगल की राजकुमार पर भर जाति के लोगों ने कुदृष्टि डाली तो मेले में घूम रहे बैसवंस के ...

Gudiya Festival

Gudiya Festival is mainly observed in Shravan month mainly in rural areas in Uttar Pradesh. Gudiya festival 2017 date is July 27. On the same day Nag Panchami festival is also organized. As part of the Gudiya Festival, children beat up cloth-made dolls. But this practice has been stopped as it indirectly cultivated violence against women. Today in many regions, baby dolls are kept on swings and people swing it.  Women sing folk songs and apply mehndi on hands. People also indulge in kite flying (patang baazi) on this day.